सार्वभौमिक करुणा एवं आत्म-शुद्धि का सर्वोच्च मार्ग
महावीर की प्रथम स्त्री शिष्या
राजकुमार से सर्वज्ञ गुरु तक
जैन क्षमा महापर्व
जैन धर्म के तीर्थ-निर्माता
श्वेतांबर पंच तीर्थ, पांच शिखर जहां तीर्थंकरों ने मुक्ति प्राप्त की, उपवास तथा अहिंसा में पैदल चलने वाले तीर्थयात्रियों को मोक्ष की ओर ही खींचते हैं।
महावीर के निर्वाण का जल मंदिर
जैन परंपरा की यह आरती भगवान महावीर के कुण्डलपुर में जन्म, उनकी दया-अहिंसा और नाम-स्मरण से कष्ट-मुक्ति का गुणगान करती है।
यह चालीसा भगवान महावीर के जीवन, गुणों और उपदेशों का एक भक्तिपूर्ण गुणगान है, जिसे प्रतिदिन पढ़ने से मनोवांछित फल प्राप्त होता है।
यह एक संस्कृत श्लोक है जो भगवान वर्धमान (महावीर) को नमस्कार करता है और उनके द्वारा रचित शास्त्र को संसार के समुद्र से पार ले जाने वाला बताता है।