दो निष्ठावान रथ-अश्वों की सहनशीलता
नागराज और शील-व्रत की रक्षा
राजा की शांत भर्त्सना
क्षान्तिवादी जातक
वह उल्लू जो बहुत जल्दी निकला
महिष जातक
उपवन-रक्षक और धैर्यवान राजा
यह एक छोटा सा दोहा (दो पंक्तियों की कविता) है, जो हमें सिखाता है कि धैर्य से सब कुछ होता है। जैसे माली पानी डालता है, लेकिन फल ऋतु आने पर ही लगता है, वैसे ही हमें मन को शांत रखकर प्रतीक्षा करनी चाहिए।