आरती
शाब्दिक अर्थ (Shabdartha)
भगवान के सम्मुख दीपक घुमाने का पावन अनुष्ठान
व्युत्पत्ति एवं धातु मूल (Vyutpatti)
संस्कृत 'आ' (सम्मुख) तथा 'रति' (उत्कट प्रेम), अथवा 'आरात्रिक' (अंधकारनाशक)।
आध्यात्मिक भावार्थ व संदर्भ
दीपक की लौ को दक्षिणावर्त दिशा में घुमाकर जीवन को ईश्वर केंद्रित करने का संदेश दिया जाता है।