Bharat Devotion

आरती

शाब्दिक अर्थ (Shabdartha)

भगवान के सम्मुख दीपक घुमाने का पावन अनुष्ठान

व्युत्पत्ति एवं धातु मूल (Vyutpatti)

संस्कृत 'आ' (सम्मुख) तथा 'रति' (उत्कट प्रेम), अथवा 'आरात्रिक' (अंधकारनाशक)।

आध्यात्मिक भावार्थ व संदर्भ

दीपक की लौ को दक्षिणावर्त दिशा में घुमाकर जीवन को ईश्वर केंद्रित करने का संदेश दिया जाता है।

प्रमुख आरती पाठ व भजन

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आरती

यह एक प्रसिद्ध हिंदू भजन है जिसमें भक्त भगवान विष्णु (जगदीश) की स्तुति करते हैं और उनसे अपने कष्टों को दूर करने की प्रार्थना करते हैं। यह भजन प्रार्थना और आरती के समय गाया जाता है।

8 verses
आरती

जैन परंपरा की यह आरती भगवान महावीर के कुण्डलपुर में जन्म, उनकी दया-अहिंसा और नाम-स्मरण से कष्ट-मुक्ति का गुणगान करती है।

7 verses
आरती

हनुमान जी की यह आरती उनके लंका-गमन, संजीवनी लाने और अहिरावण-वध का स्मरण कराती है; भक्त इसे बल, साहस और रक्षा के लिए गाते हैं।

12 verses
आरती

यह एक भक्ति गीत (आरती) है जो जैन धर्म के 23वें तीर्थंकर भगवान पार्श्वनाथ की स्तुति में गाया जाता है। इसमें उनके जीवन, रूप और दिव्य गुणों का वर्णन है।

6 verses
आरती

यह आरती भगवान श्रीकृष्ण के कुंजबिहारी स्वरूप को समर्पित है, जिसमें उनकी मनमोहक छवि, गुणों और वृंदावन की लीलाओं का वर्णन है।

12 verses
आरती

जैन परंपरा के 22वें तीर्थंकर भगवान नेमिनाथ की आरती, जो उन्हें संसार-सागर से तारने वाला और समवशरण में विराजमान बताती है।

7 verses

आरती का उल्लेख इन लेखों में