Bharat Devotion

हंस

शाब्दिक अर्थ (Shabdartha)

हंस; आत्मा

व्युत्पत्ति एवं धातु मूल (Vyutpatti)

संस्कृत में 'हंस', एक पक्षी जो पारंपरिक रूप से दूध को पानी से अलग करने में सक्षम माना जाता है; संत परंपरा का सामान्य रूपक जिसे कबीर शरीर के पिंजरे में फँसी, अपने सच्चे घर लौटने हेतु तड़पती विवेकशील आत्मा हेतु प्रयोग करते हैं।

आध्यात्मिक भावार्थ व संदर्भ

हंस की दूध को पानी से अलग करने की पौराणिक क्षमता, कबीर के हाथों में, आध्यात्मिक विवेक का रूपक बन जाती है — प्रशिक्षित आत्मा सत्य को भ्रम से अलग करना सीखती है।

हंस का उल्लेख इन लेखों में