Bharat Devotion

हठ योग

शाब्दिक अर्थ (Shabdartha)

बलपूर्वक मिलन

व्युत्पत्ति एवं धातु मूल (Vyutpatti)

'ह' (सूर्य) और 'ठ' (चंद्रमा) तथा 'योग' (मिलन) से बना; हठ योग प्रदीपिका जैसे मध्यकालीन ग्रंथों में संहिताबद्ध शारीरिक अनुशासन, जो आसन व प्राणायाम द्वारा सौर व चंद्र ऊर्जाओं को संतुलित करता है।

आध्यात्मिक भावार्थ व संदर्भ

मात्र शारीरिक व्यायाम से कहीं अधिक, हठ योग को राज योग के गहरे ध्यान हेतु शरीर-आधारित तैयारी के रूप में रचा गया, शरीर को शुद्ध करते हुए ताकि यह उच्चतर चेतना अवस्थाओं को धारण कर सके।

हठ योग का उल्लेख इन लेखों में