अभंग
काया ही पंढरी आत्मा हा विठ्ठल — संत एकनाथ अभंग
संत एकनाथ महाराज का यह सुप्रसिद्ध अभंग सगुण भक्ति और वेदांतिक अद्वैत दर्शन का परम समन्वय है। तीर्थ कहीं बाहर नहीं, स्वयं साधक के शरीर में ही प्रतिष्ठित है—यह मानव देह ही परम पावन पंढरी है, अंतरात्मा ही साक्षात् भगवान विट्ठल हैं, और सतत बहने वाली प्राण-चेतना ही पवित्र भीमा-चंद्रभागा नदी है।
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