मेत्ता
शाब्दिक अर्थ (Shabdartha)
मैत्रीपूर्ण करुणा
व्युत्पत्ति एवं धातु मूल (Vyutpatti)
पालि 'मेत्ता' से (संस्कृत 'मैत्री' से संबंधित, 'मित्र' से) — बिना शर्त, असीम सद्भावना जो अपवाद रहित सभी प्राणियों तक विस्तारित की जाती है।
आध्यात्मिक भावार्थ व संदर्भ
मेत्ता भावना, मैत्रीपूर्ण करुणा की व्यवस्थित साधना, परंपरागत रूप से स्वयं से आरंभ होती है, फिर प्रियजनों, तटस्थ व्यक्तियों, कठिन व्यक्तियों, तथा अंततः सर्वत्र सभी प्राणियों की ओर विकीर्णित होती है।