Bharat Devotion

उपनिषद

शाब्दिक अर्थ (Shabdartha)

गुरु के निकट बैठना

व्युत्पत्ति एवं धातु मूल (Vyutpatti)

'उप' (निकट) और 'नि' (नीचे) तथा 'षद्' (बैठना) से बना; प्रत्येक वेद (वेदांत) का दार्शनिक चरमोत्कर्ष बनाने वाले ग्रंथ, परंपरागत रूप से गुरु द्वारा उनके निकट बैठे शिष्यों को प्रसारित, ब्रह्म, आत्मा, तथा उनकी एकता की खोज करते हुए।

आध्यात्मिक भावार्थ व संदर्भ

छांदोग्य उपनिषद के 'तत् त्वम् असि' (वह तुम हो) जैसे कथन शताब्दियों के चिंतन को एक ही पंक्ति में समाहित करते हैं — व्यक्तिगत आत्मा परम सत्य से पृथक नहीं है।

प्रमुख उपनिषद पाठ व भजन

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