वर्ण
शाब्दिक अर्थ (Shabdartha)
रंग; वर्ग
व्युत्पत्ति एवं धातु मूल (Vyutpatti)
संस्कृत 'वर्ण' (रंग, श्रेणी); समाज का प्राचीन चतुर्विध वर्गीकरण — ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य, शूद्र — जिसे कुछ ग्रंथों में मूलतः केवल जन्म के बजाय योग्यता तथा व्यवसाय पर आधारित समझा गया था।
आध्यात्मिक भावार्थ व संदर्भ
भगवद गीता स्वयं कहती है कि वर्ण 'गुण और कर्म' (स्वभाव तथा कार्य) द्वारा निर्धारित होता है, यह श्लोक जन्म-आधारित जाति-कठोरता के विरुद्ध सुधार आंदोलनों द्वारा बार-बार उद्धृत किया जाता है।