Bharat Devotion
Embroidered artwork for पण्डित वर्ग: प्रज्ञावान और ज्ञानी का स्वभाव (गाथा 76–89): Embroidered Buddha seated in meditation on a pink lotus, with a golden dharma wheel and a white stupa in the mountains

पण्डित वर्ग

प्रज्ञावान और ज्ञानी का स्वभाव (गाथा 76–89)

पण्डित वर्ग में 14 अमूल्य गाथाएँ (76–89) समाहित हैं, जो सच्चे ज्ञानी, विवेकी और आत्म-संयमी पुरुष के लक्षणों का निरूपण करती हैं। भगवान बुद्ध बताते हैं कि ज्ञानी पुरुष उस विशाल अखण्ड शिला (पर्वत) के समान होता है जो आँधी-तूफान से विचलित नहीं होता, तथा उस गहरे, शांत और निर्मल सरोवर के सदृश होता है जिसका जल कभी क्षुब्ध नहीं होता। ज्ञानी व्यक्ति अपनी कमियाँ बताने वाले को गुप्त गड़े हुए खजाने का मार्गदर्शक मानकर उसका आदर करता है और स्तुति-निंदा में समचित्त रहता है।

श्लोक

७६। निधीनंव पवत्तारं, यं पस्से वज्जदस्सिनं; निग्गय्हवादिं मेधाविं, तादिसं पण्डितं भजे; तादिसं भजमानस्स, सेय्यो होति न पापियो।

श्लोक 1

७७। ओवदेय्यानुसासेय्य, असब्भा च निवारये; सतञ्हि सो पियो होति, असतं होति अप्पियो।

श्लोक 2

७८। न भजे पापके मित्ते, न भजे पुरिसाधमे; भजेथ मित्ते कल्याणे, भजेथ पुरिसुत्तमे।

श्लोक 3

७९। धम्मपीति सुखं सेति, विप्पसन्नेन चेतसा; अरियप्पवेदिते धम्मे, सदा रमति पण्डितो।

श्लोक 4

८०। उदकञ्हि नयन्ति नेत्तिका, उसुकारा नमयन्ति तेजनं; दारुं नमयन्ति तच्छका, अत्तानं दमयन्ति पण्डिता।

श्लोक 5

८१। सेलो यथा एकघनो, वातेन न समीरति; एवं निन्दापसंसासु, न समिञ्जन्ति पण्डिता।

श्लोक 6

८२। यथापि रहदो गम्भीरो, विप्पसन्नो अनाविलो; एवं धम्मानि सुत्वान, विप्पसीदन्ति पण्डिता।

श्लोक 7

८३। सब्बत्थ वे सप्पुरिसा चजन्ति, न कामकामा लपयन्ति सन्तो; सुखेन फुट्ठा अथ वा दुखेन, न उच्चावचं पण्डिता दस्सयन्ति।

श्लोक 8

८४। न अत्तहेतु न परस्स हेतु, न पुत्तमिच्छे न धनं न रट्ठं; न इच्छेय्य अधम्मेन समिद्धिमत्तनो, स सीलवा पञ्ञवा धम्मिको सिया।

श्लोक 9

८५। अप्पका ते मनुस्सेसु, ये जना पारगामिनो; अथायं इतरा पजा, तीरमेवानुधावति।

श्लोक 10

८६। ये च खो सम्मदक्खाते, धम्मे धम्मानुवत्तिनो; ते जना पारमेस्सन्ति, मच्चुधेय्यं सुदुत्तरं।

श्लोक 11

८७। कण्हं धम्मं विप्पहाय, सुक्कं भावेथ पण्डितो; ओका अनोकमागम्म, विवेके यत्थ दूरमं।

श्लोक 12

८८। तत्राभिरतिमिच्छेय्य, हित्वा कामे अकिञ्चनो; परियोदपेय्य अत्तानं, चित्तक्लेसेहि पण्डितो।

श्लोक 13

८९। येसं सम्बोधियङ्गेसु, सम्मा चित्तं सुभावितं; आदानपटिनिस्सग्गे, अनुपादाय ये रता; खीणासवा जुतिमन्तो, ते लोके परिनिब्बुता।

श्लोक 14

पृष्ठभूमि

श्रावस्ती के जेतवन अनाथपिण्डिक विहार तथा राजगृह के वेणुवन में उच्चारित यह वर्ग पूर्व अध्याय (बाल वर्ग) के विपरीत सच्चे पंडित और प्रज्ञावान का आदर्श चरित्र प्रस्तुत करता है। धम्मपद-अट्ठकथा के अनुसार, वृद्ध नवदीक्षित भिक्षु 'राधा' के प्रसंग में गाथा 76 उपदेशित की गई थी, जिन्होंने अपने आचार्य सारिपुत्र के कठोर अनुशासन को गड़े खजाने के समान स्वीकार कर अरहंत पद प्राप्त किया। इसी प्रकार बालक श्रमण पंडित ने जल ले जाने वाले और तीर बनाने वाले कारीगरों की एकाग्रता देखकर ध्यान सिद्ध किया।

इस पाठ के विषय में

रचयिता: Gautama Buddha · बौद्ध धर्म के संस्थापक · लगभग 5वीं–6वीं शताब्दी ईसा पूर्व, उत्तर भारत/नेपाल

लुम्बिनी में सिद्धार्थ गौतम के रूप में जन्मे, उन्होंने बोधि प्राप्त की तथा अपना शेष जीवन उत्तर भारत भर में धम्म की शिक्षा देने में व्यतीत किया। उनके प्रवचन (सुत्त), जो पाली त्रिपिटक में लिखित रूप दिए जाने से पूर्व पीढ़ियों तक मौखिक रूप से संरक्षित रहे, बौद्ध धर्म का सैद्धांतिक आधार हैं।

क्या आप जानते हैं?

गड़े खजाने का मार्गदर्शक (गाथा 76)

यदि कोई ऐसा बुद्धिमान मिले जो आपके दोषों को दर्शाए और डाँट-फटकार करे, तो उसका उसी प्रकार अनुसरण करना चाहिए जैसे छिपे हुए गुप्त खजाने को बताने वाले का किया जाता है।

अविचल पर्वत का दृष्टांत (गाथा 81)

जिस प्रकार एक ठोस और अखंड चट्टान प्रचंड आँधी-तूफान से भी नहीं हिलती, उसी प्रकार ज्ञानी पुरुष निंदा और प्रशंसा में कभी विचलित नहीं होते।

गहरा और निर्मल सरोवर (गाथा 82)

सत्य धर्म के वचनों को सुनकर ज्ञानी जन वैसे ही परम शांत और निर्मल हो जाते हैं, जैसे कोई गहरा, स्वच्छ और अथाह सरोवर शांत रहता है।

चार शिल्पी और आत्म-दमन (गाथा 80)

नहर बनाने वाले पानी को मनचाही दिशा में मोड़ते हैं, बाण बनाने वाले तीर को सीधा करते हैं, बढ़ई लकड़ी को तराशते हैं, और ज्ञानी पुरुष अपने ही मन को वश में करते हैं।

भवसागर का पार उतरना (गाथा 85–86)

मनुष्यों में बहुत थोड़े लोग ही ऐसे होते हैं जो संसार-नदी के उस पार (निर्वाण) पहुँचते हैं; बाकी अधिकांश लोग केवल इसी किनारे पर दौड़-धूप करते रह जाते हैं।

विषय के अनुसार खोजें

Buddha की संपूर्ण स्तुति एवं पाठ

Buddha

Buddha के सभी पाठ देखें →

बौद्ध धर्म से और

सभी देखें