Bharat Devotion

अभंग

शाब्दिक अर्थ (Shabdartha)

अटूट (पद्य)

व्युत्पत्ति एवं धातु मूल (Vyutpatti)

मराठी "अ-" (नहीं) + "भंग" (टूटा हुआ) से — वारकरी भक्ति संतों द्वारा प्रवर्तित सहज प्रवाह वाला मराठी भक्ति पद्य।

आध्यात्मिक भावार्थ व संदर्भ

तुकाराम, नामदेव और एकनाथ जैसे संत-कवियों द्वारा पंढरपुर के विठ्ठल की स्तुति में रचित, अभंग की सरल, अटूट लय ने सामान्य किसानों और मजदूरों को भी अपनी भाषा में भक्ति गाने दी, न कि केवल संस्कृत जानने वाले विद्वानों को।

प्रमुख अभंग पाठ व भजन

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अभंग

संत बहिणाबाई के अभंग में वारकरी मंदिर का चित्र: ज्ञानदेव ने उसकी नींव रखी, नामदेव ने उसका विस्तार किया, एकनाथ ने उसका स्तंभ खड़ा किया और तुकाराम उसका स्वर्णिम कलश बने।

6 verses
अभंग

संत चोखामेळा का अभंग: गन्ना टेढ़ा होता है परंतु उसका रस सीधा रहता है, जैसे धनुष टेढ़ा होता है परंतु उससे छूटा बाण सीधा जाता है। जन्म कभी भक्ति के भाव को टेढ़ा नहीं करता।

4 verses
अभंग

वारकरी परंपरा की दैनिक उपासना: संत ज्ञानदेव के 28 अभंग, जो उपनिषदों के अद्वैत चिंतन को भगवान विट्ठल की भक्ति के साथ सामंजस्य में लाते हैं।

28 verses
अभंग

संत ज्ञानदेव का ‘मोगरा फुलला’: हृदय के द्वार पर रोपी गई चमेली आकाश तक चढ़ती है, और उसके पुष्प भगवान विट्ठल को अर्पित शाल में गूँथे जाते हैं।

3 verses
अभंग

संत ज्ञानदेव का ‘रूप पाहता लोचनी’: विट्ठल के रूप के दर्शन का आनंद, अनेक जन्मों के सुकृत का फल, और समस्त सुखों का आगार।

4 verses
अभंग

संत एकनाथ का ‘काया ही पंढरी’: देह स्वयं पंढरपुर है, अंतर्यामी आत्मा विट्ठल है, और भक्ति भीमा नदी के रूप में बहती है।

6 verses

अभंग का उल्लेख इन लेखों में