Bharat Devotion

बाणी

शाब्दिक अर्थ (Shabdartha)

वाणी, शास्त्र

व्युत्पत्ति एवं धातु मूल (Vyutpatti)

पंजाबी "बाणी" (वचन, कथन) से — सिख धर्मग्रंथ की एक नामित, संपूर्ण रचना, जैसे जपुजी साहिब या आनंद साहिब, जो नित्नेम के भाग के रूप में प्रतिदिन पढ़ी जाती है।

आध्यात्मिक भावार्थ व संदर्भ

जहाँ "शब्द" किसी एक स्तोत्र को दर्शा सकता है, "बाणी" एक संपूर्ण, नामित रचना है जो पूरी तरह पढ़ी जाती है — यह सिख के नित्य भक्ति अनुशासन का आधार है।

प्रमुख बाणी पाठ व भजन

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बाणी

यह गुरु नानक देव जी द्वारा रचित एक पवित्र प्रार्थना है, जो सिख धर्म के मूल ग्रंथ गुरु ग्रंथ साहिब की शुरुआत में आती है। इसमें ईश्वर की एकता, उसकी महिमा और सच्चाई के मार्ग का वर्णन किया गया है।

40 verses
बाणी

गुरु अमर दास जी द्वारा रचित आनंद का सम्पूर्ण शब्द (41 प्रविष्टियाँ: एक शीर्षक तथा परंपरागत 40 पौड़ियाँ), जो सतगुरु के प्रति भक्ति का उत्सव मनाता है।

41 verses
बाणी

यह एक प्रार्थना है जिसमें भक्त भगवान से अपने हाथ की रक्षा और सभी बाधाओं को दूर करने की याचना करता है।

11 verses
बाणी

जाप साहिब दसम ग्रंथ में गुरु गोबिंद सिंह जी का प्रातःकालीन स्तुति-गीत है, जो अपने सम्पूर्ण 199 पदों में निराकार, कालातीत रचयिता की अनेक नामों से उस्तति करता है।

199 verses
बाणी

यह संग्रह श्री गुरु ग्रंथ साहिब और दशम ग्रंथ से लिए गए विभिन्न प्रकार के भजनों और प्रार्थनाओं का समूह है, जो ईश्वर की स्तुति, उनके गुणों का गान, और उनकी शरण की विनती करते हैं।

86 verses
बाणी

कीरतन सोहिला गुरु ग्रंथ साहिब (अंग 12–13) की पाँच शबदों वाली सिख रात्रि-प्रार्थना है, जो सोने के समय और अंतिम संस्कार में गाई जाती है।

30 verses

बाणी का उल्लेख इन लेखों में