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सहस्रनाम

शाब्दिक अर्थ (Shabdartha)

एक हज़ार नाम

व्युत्पत्ति एवं धातु मूल (Vyutpatti)

संस्कृत 'सहस्र' (एक हज़ार) और 'नाम' से — किसी देवता के हज़ार नामों का पाठ करने वाला स्तोत्र।

आध्यात्मिक भावार्थ व संदर्भ

एक स्तोत्र जो पारंपरिक रूप से किसी एक देवता के 1000 नामों का पाठ करता है, जिनमें से प्रत्येक एक विशिष्ट गुण, कथा, या पक्ष को दर्शाता है — पूरी सूची का पाठ उस देवता को गहराई से जानने और पूरी तरह सम्मानित करने के समान माना जाता है।

प्रमुख सहस्रनाम पाठ व भजन

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सहस्रनाम

विष्णु सहस्रनाम का आरंभिक ध्यान-श्लोक: श्वेत वस्त्रधारी, चतुर्भुज, प्रसन्नमुख विष्णु का ध्यान, सब विघ्नों की शांति के लिए।

1 verse
सहस्रनाम

यह एक पवित्र स्तोत्र है जिसमें भगवान भैरव के अघोर स्वरूप के एक हजार नामों का वर्णन है। यह संवाद देवी भैरवी और भगवान भैरव के बीच हुआ है।

12 verses
सहस्रनाम

ब्रह्माण्ड पुराण में हयग्रीव द्वारा अगस्त्य को उपदिष्ट देवी ललिता त्रिपुरसुन्दरी के १००० नाम; श्रीविद्या उपासना के १८२ श्लोक।

182 verses
सहस्रनाम

महाभारत के अनुशासन पर्व में शिव के एक सहस्र नामों का स्तोत्र, जिसे उपमन्यु ने श्रीकृष्ण को सुनाया और श्रीकृष्ण ने युधिष्ठिर को।

119 verses
सहस्रनाम

महाभारत, अनुशासन पर्व (अध्याय १४९) में भीष्म द्वारा युधिष्ठिर को उपदिष्ट विष्णु के सहस्र नाम, १०८ श्लोकों में।

108 verses

सहस्रनाम का उल्लेख इन लेखों में

एकादशी व्रत का मार्गदर्शक: एकादशी देवी का प्राकट्य, उपवास के तीन प्रकार, वर्जित आहार, पूजन विधि तथा द्वादशी पारण और हरि वासर के नियम।

पद्म पुराण में वर्णित माघ शुक्ल पक्ष की जया एकादशी की पावन कथा, जिसके प्रभाव से माल्यवान और पुष्पवती पिशाच योनि के घोर कष्ट से मुक्त हुए थे।

सूर्य पुराण में वर्णित वैशाख शुक्ल पक्ष की मोहिनी एकादशी की पावन कथा, जिसमें महर्षि कौण्डिन्य के उपदेश से धृष्टबुद्धि नामक पापी पुत्र के सभी घोर पाप नष्ट हो गए थे।

पद्म पुराण में वर्णित ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष की भीमसेनी निर्जला एकादशी की पावन कथा, जिसमें जल की एक बूँद भी ग्रहण किए बिना व्रत रखा जाता है।

भविष्योत्तर पुराण में वर्णित चैत्र कृष्ण पक्ष की पापमोचिनी एकादशी की पावन कथा, जिसके प्रभाव से ऋषि मेधावी और अप्सरा मंजुघोषा घोर शाप व पापों से मुक्त हुए थे।

शिव को पाने हेतु पार्वती का तप