सहस्रनाम
शाब्दिक अर्थ (Shabdartha)
एक हज़ार नाम
व्युत्पत्ति एवं धातु मूल (Vyutpatti)
संस्कृत 'सहस्र' (एक हज़ार) और 'नाम' से — किसी देवता के हज़ार नामों का पाठ करने वाला स्तोत्र।
आध्यात्मिक भावार्थ व संदर्भ
एक स्तोत्र जो पारंपरिक रूप से किसी एक देवता के 1000 नामों का पाठ करता है, जिनमें से प्रत्येक एक विशिष्ट गुण, कथा, या पक्ष को दर्शाता है — पूरी सूची का पाठ उस देवता को गहराई से जानने और पूरी तरह सम्मानित करने के समान माना जाता है।