Bharat Devotion

वचन

शाब्दिक अर्थ (Shabdartha)

शरणों द्वारा सरल लोकभाषा में कहे गए आध्यात्मिक उद्गार

व्युत्पत्ति एवं धातु मूल (Vyutpatti)

संस्कृत धातु 'वच्' (बोलना)।

आध्यात्मिक भावार्थ व संदर्भ

कन्नड़ साहित्य के अनमोल भक्ति पद, जो सामाजिक समानता और ईश्वर प्रेम की सीख देते हैं।

प्रमुख वचन पाठ व भजन

सभी देखें
वचन

यह एक भक्ति-कविता (वचन) है, जिसमें संत अल्लम प्रभु कहते हैं कि जिसने भगवान चेन्नमल्लिकार्जुन (शिव) को जान लिया, उसे सांसारिक सुखों, इच्छाओं और मोह की कोई आवश्यकता नहीं रहती।

3 verses
वचन

यह एक भक्ति गीत है जो भगवान कुडलसंगमदेव की महिमा का गान करता है। इसमें बताया गया है कि प्रभु स्वयं वेद, शास्त्र, तर्क, आगम और पुराणों के रूप में विद्यमान हैं, और उनके चरणों की धूल ही सच्ची शरण है।

1 verse
वचन

इस वचन में बसवण्णा प्रार्थना करते हैं कि उन्हें अजनबी नहीं, कूडलसंगमदेव के अपने घर का पुत्र कहा जाए।

3 verses
वचन

यह वचन बसवण्ण द्वारा रचित है, जिसमें सदाचार के सात नियमों का वर्णन है: न मारना, न चोरी करना, न झूठ बोलना, न क्रोध करना, दूसरों से घृणा न करना, स्वयं की प्रशंसा न करना, और दूसरों की निंदा न करना। इसे आंतरिक और बाह्य शुद्धि का साधन बताया गया है।

1 verse
वचन

जगद्गुरु बसवेश्वर का यह प्रसिद्ध कन्नड़ वचन 'कायकावे कैलास' (कर्म ही पूजा है / काम ही मोक्ष है) का अमर संदेश देता है। बसवण्णा सिखाते हैं कि पूरी निष्ठा और पवित्र मन से किया गया सत्कर्म ही ईश्वर का साक्षात्कार है।

1 verse
वचन

यह एक प्रसिद्ध भक्ति कविता (वचन) है जिसमें भक्त अपने शरीर के अंगों को भगवान शिव के मंदिर के विभिन्न भागों के रूप में वर्णित करता है और अंत में प्रश्न करता है कि क्या यह मानव-निर्मित मंदिर स्थायी है या नाशवान।

1 verse

वचन का उल्लेख इन लेखों में