वचन
चेन्नमल्लिकार्जुन का वैराग्य-वचन
यह एक भक्ति-कविता (वचन) है, जिसमें संत अल्लम प्रभु कहते हैं कि जिसने भगवान चेन्नमल्लिकार्जुन (शिव) को जान लिया, उसे सांसारिक सुखों, इच्छाओं और मोह की कोई आवश्यकता नहीं रहती।
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सर्वशास्त्रमयी स्तुति – कुडलसंगमदेव को नमन
यह एक भक्ति गीत है जो भगवान कुडलसंगमदेव की महिमा का गान करता है। इसमें बताया गया है कि प्रभु स्वयं वेद, शास्त्र, तर्क, आगम और पुराणों के रूप में विद्यमान हैं, और उनके चरणों की धूल ही सच्ची शरण है।
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इवनारव — ये हमारे अपने हैं
इस वचन में बसवण्णा प्रार्थना करते हैं कि उन्हें अजनबी नहीं, कूडलसंगमदेव के अपने घर का पुत्र कहा जाए।
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बसवण्ण का वचन: आंतरिक और बाह्य शुद्धि का मार्ग
यह वचन बसवण्ण द्वारा रचित है, जिसमें सदाचार के सात नियमों का वर्णन है: न मारना, न चोरी करना, न झूठ बोलना, न क्रोध करना, दूसरों से घृणा न करना, स्वयं की प्रशंसा न करना, और दूसरों की निंदा न करना। इसे आंतरिक और बाह्य शुद्धि का साधन बताया गया है।
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कायकावे कैलास — बसवेश्वर वचन
जगद्गुरु बसवेश्वर का यह प्रसिद्ध कन्नड़ वचन 'कायकावे कैलास' (कर्म ही पूजा है / काम ही मोक्ष है) का अमर संदेश देता है। बसवण्णा सिखाते हैं कि पूरी निष्ठा और पवित्र मन से किया गया सत्कर्म ही ईश्वर का साक्षात्कार है।
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देह ही शिवालय – बसवन्ना का वचन
यह एक प्रसिद्ध भक्ति कविता (वचन) है जिसमें भक्त अपने शरीर के अंगों को भगवान शिव के मंदिर के विभिन्न भागों के रूप में वर्णित करता है और अंत में प्रश्न करता है कि क्या यह मानव-निर्मित मंदिर स्थायी है या नाशवान।
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