श्री राधा-माधव स्तुति
भक्तिविनोद ठाकुर को श्रेय दिया जाने वाला गौड़ीय वैष्णव गीत, जो कृष्ण के नामों और वृन्दावन-लीलाओं का गुणगान करता है।
श्लोक
राधा-माधव (श्रीकृष्ण) को जय हो, जो कुंज-वनों में विहार करने वाले, गोपियों के प्रियतम तथा गोवर्धन महापर्वत को धारण करने वाले हैं।
श्लोक 1
जो यशोदा-नन्दन हैं, व्रजवासियों को आनंदित करने वाले हैं, और यमुना के तट के वनों में विचरण करने वाले हैं।
श्लोक 2
पूजन विधि एवं फलश्रुति (महत्व व लाभ)
बुधवार, गुरुवार एवं एकादशी तिथि
प्रातःकाल (ब्रह्म मुहूर्त) अथवा संध्या वेला
तुलसी दल, माखन-मिश्री का भोग, पीले पुष्प एवं चंदन
- परम भक्ति, मानसिक आनंद, भय-चिंता से मुक्ति एवं आत्मिक शांति
पृष्ठभूमि
यह गीत राधा-कृष्ण भक्ति की गौड़ीय वैष्णव परंपरा का है और भक्तिविनोद ठाकुर (1838–1914) को श्रेय दिया जाता है; इस्कॉन में इसे 'जय राधा-कृष्ण गीति' कहा जाता है। श्रील प्रभुपाद इसे प्रवचन से पहले सिखाते और गाते थे, जैसे 14 फरवरी 1971 के गोरखपुर प्रवचन में। इसमें कृष्ण के नाम गिनाए गए हैं: राधा-माधव, कुञ्ज-बिहारी, गोपी-जन-वल्लभ, गोवर्धनधारी (भागवत पुराण 10.25), यशोदा-नन्दन, व्रज-जन-रंजन और यमुना-तट-विहारी। इसे पूजा और उत्सवों में कीर्तन के रूप में गाया जाता है।
इस पाठ के विषय में
रचयिता: Bhaktivinoda Thakur
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गौड़ीय वैष्णव सम्प्रदाय से और
क्या आप जानते हैं?
राधा-माधव
'राधा-माधव' का अर्थ है राधा और माधव (कृष्ण) का युगल। यह संबोधन गौड़ीय वैष्णव परंपरा में विशेष महत्व रखता है, जहाँ राधा और कृष्ण की युगल उपासना की जाती है।
कुञ्ज-बिहारी
'कुञ्ज-बिहारी' का शाब्दिक अर्थ है 'कुंजों (बेलों के मंडपों) में विहार करने वाला'। यह कृष्ण के वृंदावन में गोपियों के साथ लीलाओं की ओर संकेत करता है।
गिरि-वर-धारी
यह विशेषण कृष्ण द्वारा गोवर्धन पर्वत को अपनी छोटी उंगली पर उठाने की लीला (गोवर्धन पूजा) की ओर इशारा करता है, जिससे उन्होंने इंद्र के अहंकार को चूर किया था।
यशोदा-नन्दन
'यशोदा-नन्दन' कहकर कृष्ण को माता यशोदा के पुत्र के रूप में वर्णित किया गया है। यह उनके बाल रूप एवं मातृ-स्नेह के प्रति भक्तों के प्रेम को दर्शाता है।
यमुना-तीर-वन
'यमुना-तीर-वना' का अर्थ है यमुना के तट पर स्थित वनों में विचरण करने वाला। यमुना नदी पवित्र मानी जाती है और उसके तट पर कृष्ण की अनेक लीलाएँ (जैसे दान-लीला, रास-लीला) हुईं।
Krishna
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