अष्ट महास्थान
भगवान बुद्ध के आठ महान पावन तीर्थ एवं लीला स्थल
लुम्बिनी, बोधगया, सारनाथ और कुशीनगर के अतिरिक्त बौद्ध परंपरा में राजगीर, वैशाली, श्रावस्ती और संकिसा को मिलाकर 'अष्ट महास्थान' कहा जाता है, जहाँ भगवान बुद्ध ने महत्वपूर्ण धम्म उपदेश और अलौकिक लीलाएं प्रदर्शित की थीं।
अष्ट महास्थानों का पावन आध्यात्मिक रहस्य
प्राचीन बौद्ध परंपरा और सम्राट अशोक के शिलालेखों में आठ महान तीर्थों का विशेष वर्णन मिलता है जिन्हें अष्ट महास्थान कहा जाता है।
इनमें से चार स्थान तथागत के जीवन के प्रमुख कल्याणकों (जन्म, संबोधि, धर्मचक्र व महापरिनिर्वाण) से जुड़े हैं, जबकि चार अन्य स्थान (श्रावस्ती, संकिसा, राजगीर व वैशाली) उन पावन घटनाओं के साक्षी हैं जहाँ भगवान बुद्ध ने महत्वपूर्ण सूत्र उपदेश दिए और करुणा की पराकाष्ठा दिखाई।
तथागत के आठ पावन महातीर्थ
पावन त्रिशरण गाथा
प्रत्येक बौद्ध तीर्थ में गूंजने वाला अनादि वचन:
बुद्धं सरणं गच्छामि।
धम्मं सरणं गच्छामि।
संघं सरणं गच्छामि॥
के तपाईं जान्नुहुन्छ?
Jetavana at Shravasti
The Buddha spent more rainy seasons (25 years) meditating and teaching at the Jetavana monastery in Shravasti than anywhere else.
Vulture Peak (Gridhrakuta)
Situated atop the craggy hills of Rajgir, Vulture Peak was the beloved meditation sanctuary where the Buddha taught the Heart Sutra.
First Female Monks at Vaishali
At the urging of Ananda and Mahaprajapati Gautami, the Buddha permitted the establishment of the Bhikkhuni Sangha in Vaishali.
Ashoka's Elephant Capital
At Sankassa, the remains of an ancient Ashokan pillar topped with an elephant capital marks the legendary site of descent.
Buddha
बौद्ध धर्म बाट थप
सम्बन्धित शिक्षाहरू
उही शिक्षा, विभिन्न परम्पराहरूमा प्रतिध्वनित
