सुत्त
शाब्दिक अर्थ (Shabdartha)
सूत्र, प्रवचन
व्युत्पत्ति एवं धातु मूल (Vyutpatti)
पालि/संस्कृत 'सुत्त/सूत्र' से — एक धागा — बुद्ध या उनके प्रत्यक्ष शिष्यों को परंपरागत रूप से प्रदत्त एक प्रवचन, जो स्मरण एवं पाठ हेतु शिक्षाओं को 'धागे में पिरोता' है।
आध्यात्मिक भावार्थ व संदर्भ
मेत्ता सुत्त तथा मंगल सुत्त जैसे सुत्त थेरवाद बौद्ध देशों में संरक्षक परित्त के रूप में पढ़े जाते हैं, यह विश्वास करते हुए कि बुद्ध के अपने शब्दों की शक्ति से आशीर्वाद तथा सुरक्षा उत्पन्न होती है।