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श्री शिव चालीसा (अयोध्यादास रचित)

श्री शिव चालीसा (अयोध्यादास रचित)

संत अयोध्यादास यांनी रचलेले भगवान शिवाला समर्पित चाळीस श्लोकांचे स्तोत्र, ज्यात त्यांच्या दैवी लीलांचे वर्णन आहे आणि कृपा व संकटनिवारणासाठी त्याचे पठण केले जाते.

श्लोक

मंगलाचरण (दोहा)

चालीसा वाचनापूर्वी गुरुवंदना आणि मंगलाचरण दोहा.

दोहा जय गणेश गिरिजा सुवन, मंगल मूल सुजान कहत अयोध्यादास तुम, देहु अभय वरदान
Doha Jai Ganesh Girija Suvan, Mangal Mool Sujaan. Kahat Ayodhyadaas Tum, Dehu Abhay Vardaan.

श्लोक दोहा

चालीसा (४० चौपाई)

प्रभूच्या अपार महिमेचे, बळाचे आणि कृपेचे गुणगान करणाऱ्या मुख्य ४० चौपाया.

जय गिरिजापति दीनदयाला सदा करत संतन प्रतिपाला
Jai Girijapati Deendayaala. Sada Karat Santan Pratipaala.

श्लोक 1

चौपाई भाल चन्द्रमा सोहत नीके कानन कुण्डल नागफनी के
Chaupai Bhaal Chandrama Sohat Neeke. Kaanan Kundal Naagphani Ke.

श्लोक 2

अंग गौर शिर गंग बहाये मुण्डमाल तन क्षार लगाये
Ang Gaur Shir Gang Bahaaye. Mundmaal Tan Kshaar Lagaaye.

श्लोक 3

वस्त्र खाल बाघम्बर सोहे छवि को देख नाग मुनि मोहे
Vastra Khaal Baghambar Sohe. Chhavi Ko Dekh Naag Muni Mohe.

श्लोक 4

मैना मातु की हवै दुलारी बाम अंग सोहत छवि न्यारी
Maina Maatu Ki Havai Dulaari. Baam Ang Sohat Chhavi Nyaari.

श्लोक 5

कर त्रिशूल सोहत छवि भारी करत सदा शत्रुन क्षयकारी
Kar Trishool Sohat Chhavi Bhaari. Karat Sada Shatrun Kshaykaari.

श्लोक 6

नन्दि गणेश सोहैं तहं कैसे सागर मध्य कमल हैं जैसे
Nandi Ganesh Sohain Tahan Kaise. Saagar Madhya Kamal Hain Jaise.

श्लोक 7

कार्तिक श्याम और गणराऊ या छवि को कहि जात न काऊ
Kaartik Shyaam Aur Ganraau. Yaa Chhavi Ko Kahi Jaat Na Kaau.

श्लोक 8

देवन जबहीं जाय पुकारा तबहीं दुख प्रभु आप निवारा
Devan Jabheen Jaay Pukaara. Tabheen Dukh Prabhu Aap Nivaara.

श्लोक 9

किया उपद्रव तारक भारी देवन सब मिलि तुमहिं जुहारी
Kiya Upadrav Taarak Bhaari. Devan Sab Mili Tumhin Juhaari.

श्लोक 10

तुरत षडानन आप पठायो लवनिमेष महं मारि गिरायो
Turat Shadaanan Aap Pathaayo. Lavnimesh Mahan Maari Giraayo.

श्लोक 11

आप जलंधर असुर संहारा सुयश तुम्हार विदित संसारा
Aap Jalandhar Asur Sanhaara. Suyash Tumhaar Vidit Sansaara.

श्लोक 12

त्रिपुरासुर सन युद्ध मचाई सबहिं कृपा करि लीन बचाई
Tripuraasur San Yuddh Machaai. Sabahin Kripa Kari Leen Bachaai.

श्लोक 13

किया तपहिं भागीरथ भारी पुरब प्रतिज्ञा तासु पुरारी
Kiya Tapahin Bhaageerath Bhaari. Purab Pratigya Taasu Puraari.

श्लोक 14

दानिन महं तुम सम कोउ नाहीं सेवक अस्तुति करत सदाहीं
Daanin Mahan Tum Sam Kou Naaheen. Sevak Astuti Karat Sadaaheen.

श्लोक 15

वेद माहि महिमा तुम गाई अकथ अनादि भेद नहिं पाई
Ved Maahi Mahima Tum Gaai. Akath Anaadi Bhed Nahin Paai.

श्लोक 16

प्रकटे दधि मंथन में ज्वाला जरत सुरासुर भए विहाला
Prakate Dadhi Manthan Mein Jwaala. Jarat Suraasur Bhae Vihaala.

श्लोक 17

कीन्ह दया तहं करी सहाई नीलकण्ठ तब नाम कहाई
Keenh Daya Tahan Kari Sahaai. Neelkanth Tab Naam Kahaai.

श्लोक 18

पूजन रामचन्द्र जब कीन्हा जीत के लंक विभीषण दीन्हा
Poojan Ramchandra Jab Keenha. Jeet Ke Lank Vibheeshan Deenha.

श्लोक 19

सहस कमल में हो रहे धारी कीन्ह परीक्षा तबहिं पुरारी
Sahas Kamal Mein Ho Rahe Dhaari. Keenh Pareeksha Tabahin Puraari.

श्लोक 20

एक कमल प्रभु राखेउ गोई कमल नयन पूजन चहं सोई
Ek Kamal Prabhu Raakheu Goi. Kamal Nayan Poojan Chahan Soi.

श्लोक 21

कठिन भक्ति देखी प्रभु संकर भए प्रसन्न दिए इच्छित वर
Kathin Bhakti Dekhi Prabhu Sankar. Bhae Prasann Die Ichchhit Var.

श्लोक 22

जय जय जय अनंत अविनाशी करत कृपा सब के घट वासी
Jai Jai Jai Anant Avinaashi. Karat Kripa Sab Ke Ghat Vaasi.

श्लोक 23

दुष्ट सकल नित मोहि सतावैं भ्रमत रहौं मोहि चैन न आवै
Dusht Sakal Nit Mohi Sataavain. Bhramat Rahon Mohi Chain Na Aavai.

श्लोक 24

त्राहि त्राहि मैं नाथ पुकारो यहि अवसर मोहि आन उबारो
Traahi Traahi Main Nath Pukaro Yahi Avasar Mohi Aan Ubaro

श्लोक 25

लै त्रिशूल शत्रुन को मारो संकट ते मोहि आन उबारो
Lai Trishool Shatrun Ko Maro Sankat Te Mohi Aan Ubaro

श्लोक 26

मात-पिता भ्राता सब होई संकट में पूछत नहिं कोई
Maat Pita Bhraata Sab Hoi Sankat Mein Poochhat Nahin Koi

श्लोक 27

स्वामी एक है आस तुम्हारी आय हरहु मम संकट भारी
Swami Ek Hai Aas Tumhari Aay Harahu Mam Sankat Bhari

श्लोक 28

धन निर्धन को देत सदा ही जो कोई जांचे सो फल पाहीं
Dhan Nirdhan Ko Det Sada Hi Jo Koi Jaanche So Phal Paahin

श्लोक 29

अस्तुति केहि विधि करौं तुम्हारी शमहु नाथ अब चूक हमारी
Astuti Kehi Vidhi Karoon Tumhari Shamahu Nath Ab Chook Hamari

श्लोक 30

शंकर हो संकट के नाशन मंगल कारण विघ्न विनाशन
Shankar Ho Sankat Ke Naashan Mangal Kaaran Vighna Vinaashan

श्लोक 31

योगी यति मुनि ध्यान लगावैं शारद नारद शीश नवावैं
Yogi Yati Muni Dhyan Lagavain Sharad Narad Sheesh Navavain

श्लोक 32

नमो नमो जय नमः शिवाय सुर ब्रह्मादिक पार न पाय
Namo Namo Jai Namah Shivay Sur Brahmadik Par Na Paay

श्लोक 33

जो यह पाठ करे मन लाई ता पर होत शम्भु सहाई
Jo Yeh Paath Kare Man Laai Taa Par Hot Shambhu Sahai

श्लोक 34

ऋनियां जो कोई हो अधिकारी पाठ करे सो पावनकारी
Riniyaan Jo Koi Ho Adhikari Paath Kare So Paavankari

श्लोक 35

पुत्र हीन कर इच्छा कोई निश्चय शिव प्रसाद तेहि होई
Putra Heen Kar Ichha Koi Nischay Shiv Prasad Tehi Hoi

श्लोक 36

पण्डित त्रयोदशी को लावे ध्यान पूर्वक होम करावे
Pandit Trayodashi Ko Laave Dhyan Poorvak Hom Karave

श्लोक 37

त्रयोदशी व्रत करै हमेशा तन नहीं ताके रहै कलेशा
Trayodashi Vrat Karai Hamesha Tan Nahin Taake Rahai Kalesha

श्लोक 38

धूप दीप नैवेद्य चढ़ावे शंकर सम्मुख पाठ सुनावे
Dhoop Deep Naivedya Chadhave Shankar Sammukh Paath Sunave

श्लोक 39

जन्म जन्म के पाप नसावे अन्त धाम शिवपुर में पावे
Janam Janam Ke Paap Nasave Ant Dhaam Shivpur Mein Paave

श्लोक 40

कहैं अयोध्यादास आस तुम्हारी जानि सकल दुख हरहु हमारी
Kahain Ayodhyadaas Aas Tumhari Jaani Sakal Dukh Harahu Hamari

श्लोक 41

समापन दोहा

प्रभूने हृदयात सदैव वास करावा अशी प्रार्थना आणि चालीसाची सांगता.

दोहा नित्त नेम करि प्रातः ही, पाठ करौ चालीस तुम मेरी मनकामना, पूर्ण करो जगदीश
Doha Nitt Nem Kari Praatah Hi, Paath Karau Chalees Tum Meri Mankamna, Poorn Karo Jagdeesh

श्लोक दोहा 1

मगसिर छठि हेमन्त ऋतु, संवत चौंसठ जान अस्तुति चालीसा शिवहि, पूर्ण कीन कल्याण
Magsir Chhathi Hemant Ritu, Samvat Chaunsath Jaan Astuti Chalisa Shivahi, Poorn Keen Kalyan

श्लोक दोहा 2

Worship Guidelines & Chanting Benefits (Phalashruti)

Auspicious Day

सोमवार व प्रदोष

Best Time (Muhurta)

ब्राह्ममुहूर्त किंवा संध्याकाळची प्रदोष वेळ

Sacred Offerings

बेलपत्र, गंगाजल, भस्म व पांढरी फुले

Spiritual Benefits (Phalashruti)
  • चित्तशांती, पापनाश व भयमुक्ती
Chanting Practice:Reciting 1 to 11 times daily for 40 consecutive days is traditionally practiced for resolution of difficulties.

पृष्ठभूमि

हे स्तोत्र उत्तर भारतातील व्यापक शैव भक्तिपरंपरेचा भाग आहे; ते पारंपरिकरीत्या कवी-संत अयोध्यादास यांनी रचलेले मानले जाते. यातील श्लोक पुराणांमध्ये, ज्यात शिवपुराणाचाही समावेश आहे, आढळणाऱ्या शिवलीलांचे पुनर्कथन करतात. भक्त याचे पठण दैनंदिन प्रार्थना म्हणून किंवा सोमवार (शिवासाठी पवित्र मानला जाणारा वार) आणि श्रावण महिन्यासारख्या विशेष प्रसंगी करतात. ही रचना ‘चालीसा’ म्हणून ओळखली जाते, म्हणजे चाळीस श्लोकांची भक्तिकाव्यरचना, आणि भगवान शिवाचे संरक्षण, आशीर्वाद व विघ्नहरण यांचे आवाहन करण्यासाठी तिचा उपयोग होतो.

या पाठाबद्दल

रचयिता: Ayodhyadas

तुम्हाला माहीत आहे का?

रचयिता

ही शिवचालीसा अयोध्यादास या संताने रचली आहे. यात सुरुवातीला व शेवटी एकेक दोहा व मध्ये ४० चौपाया आहेत. ही रचना शिवाच्या स्तुतीसाठी प्रसिद्ध आहे.

समुद्रमंथनातील नीलकंठाची कथा

देव व दानवांनी समुद्रमंथन केले तेव्हा त्यातून विषारी ज्वाला निघाली. ती सर्वांना त्रासदायक ठरल्यावर शिवाने ती गिळली व त्यांचा कंठ निळा झाला, म्हणून त्यांना 'नीलकंठ' म्हटले जाते. (श्लोक १७-१८)

रामाने केलेले शिवपूजन

रामाने लंकेवर चढाईपूर्वी शिवाची पूजा केली. पूजेसाठी सहस्र कमळे आणली, पण एक कमळ कमी पडल्यावर रामाने स्वतःचे कमळनयन अर्पण करण्याचा प्रयत्न केला. यामुळे प्रसन्न होऊन शिवाने त्यांना इच्छित वरदान दिले. (श्लोक १९-२२)

भगीरथाचे तप व गंगा

गंगा नदीला पृथ्वीवर आणण्यासाठी भगीरथाने कठोर तप केले. शिवाने त्याची प्रतिज्ञा पूर्ण करण्यासाठी गंगेला आपल्या जटेत धारण केले. (श्लोक १४)

त्रिपुरासुर वध

तीन दैत्यांनी तीन पुरी बांधून उपद्रव केला होता. देवांच्या प्रार्थनेवरून शिवाने त्यांच्याशी युद्ध करून सर्वांचे रक्षण केले. (श्लोक १३)

Shiva ची संपूर्ण स्तुती व पाठ

Shiva

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