दोहा
शाब्दिक अर्थ (Shabdartha)
एक तुकांत दोहरा छंद
व्युत्पत्ति एवं धातु मूल (Vyutpatti)
प्राकृत/अपभ्रंश 'दोहा' से — हिंदी और अवधी भक्ति-काव्य में प्रचलित दो-पंक्ति का तुकांत छंद।
आध्यात्मिक भावार्थ व संदर्भ
एक संक्षिप्त, स्वतः पूर्ण दो-पंक्ति पद्य — हनुमान चालीसा जैसे स्तोत्र दोहे से आरंभ और समापन करते हैं, जो मुख्य पदों को संकल्प या आशीर्वाद के कथन से घेरता है।