Bharat Devotion

शब्द

शाब्दिक अर्थ (Shabdartha)

शब्द, वाणी

व्युत्पत्ति एवं धातु मूल (Vyutpatti)

पंजाबी/संस्कृत "शब्द" (शब्द, स्वर) से — किसी सिख गुरु या भगत द्वारा रचित तथा राग में निबद्ध एक स्तोत्र, जो सिख धर्मग्रंथ में संकलित है।

आध्यात्मिक भावार्थ व संदर्भ

सिख धर्मशास्त्र में शब्द केवल एक गीत नहीं, बल्कि गुरु की सजीव वाणी है — कीर्तन में इसे गाना दिव्य शब्द से सीधे संवाद करने का मार्ग माना जाता है।

प्रमुख शब्द पाठ व भजन

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सिख अरदास संगत की सामूहिक प्रार्थना है, जो गुरु गोबिंद सिंह जी की “वार श्री भगौती जी की” से आरंभ होकर सरबत के भले की याचना पर समाप्त होती है।

15 verses
शब्द

भक्त रविदास का शबद, जो 'बेगमपुरा' नामक उस आदर्श नगर का वर्णन करता है जहाँ न दुःख है, न कर, न भय; यह सामाजिक समानता और आध्यात्मिक मुक्ति का दर्शन है।

2 verses
शब्द

भक्त रविदास का राग मारू में रचा गया शबद (अंग 1106): वह प्रभु, जो गरीबों का रखवाला है, नीचों को ऊँचा उठाता है और नामदेव, कबीर, त्रिलोचन, सधना तथा सैन को भवसागर से पार लगाता है।

4 verses
शब्द

गुरु अर्जन देव जी का गूजरी राग का श्लोक (अंग 517), जो रहिरास साहिब में भी पढ़ा जाता है: रखवाला प्रभु अपने भक्तों को बचाता है और निंदकों का नाश करता है।

3 verses
शब्द

भक्त रविदास का राग धनासरी में रचा शबद (अंग 694), जो प्रभु से वियोग की पीड़ा और मिलन की गहरी तड़प का शब्दशः पाठ है।

3 verses
शब्द

भगत रविदास जी समझाते हैं कि जीव और प्रभु एक ही हैं: जैसे समुद्र की लहरें जल ही हैं, जैसे स्वप्न में राजा स्वयं को भिखारी देखता है, और जैसे रस्सी साँप जान पड़ती है।

6 verses

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