Shukla Paksha, Ashwin
माँ भगवती के नौ दिव्य स्वरूपों की आराधना का नौ दिवसीय महापर्व।
नाम, स्थान और महत्व
अठारह महाशक्तिपीठ
कोलकाता का दक्षिणेश्वर काली मंदिर, जिसे रानी रासमणि ने 1855 में स्थापित किया, माँ भवतारिणी का धाम और श्रीरामकृष्ण की साधना का स्थल है।
आध्यात्मिक तथा आयुर्वेदिक विज्ञान
यह देवी के कवच (रक्षा-कवच) का पाठ है, जो देवी महात्म्य (सप्तशती) के पाठ से पहले किया जाता है। इसमें नवदुर्गाओं और विभिन्न देवियों का आह्वान कर शरीर के प्रत्येक अंग और दिशाओं की रक्षा की प्रार्थना की गई है।
यह एक पवित्र प्रार्थना है, जिसे कवच कहा जाता है। इसमें भगवान शिव के अघोर रूप से सभी दिशाओं और परिस्थितियों में अपनी रक्षा करने और आशीर्वाद देने की प्रार्थना की जाती है।
यह एक मराठी भाषा में रचित भजन है जिसमें भक्त देवी दुर्गा (महिषासुरमर्दिनी) की स्तुति करते हुए उनसे जीवन के कष्टों से मुक्ति की प्रार्थना करता है।
यह 40 छंदों का एक भक्ति गीत है जो माँ दुर्गा की महिमा, उनके विभिन्न रूपों और उनके द्वारा राक्षसों के वध का वर्णन करता है।
यह देवी भागवत पुराण का एक स्तोत्र है, जो माँ संध्या (जिन्हें गायत्री, सावित्री और सरस्वती भी कहा जाता है) की महिमा का वर्णन करता है। इसमें माता के कई रूपों, उनकी शक्तियों और इस स्तोत्र के पाठ से मिलने वाले लाभों का उल्लेख है।
यह एक संस्कृत स्तोत्र है जो देवी अखिलाण्डेश्वरि की स्तुति करता है। इसमें उनके विभिन्न रूपों, गुणों और शक्तियों का वर्णन है, और भक्त इसे पढ़कर उनकी कृपा की प्रार्थना करते हैं।
यह एक दिव्य स्तोत्र है जो देवी अखिलाण्डनायिका (सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड की स्वामिनी) की स्तुति करता है। इसमें उनकी अलौकिक सुंदरता, शक्ति और कृपा का वर्णन किया गया है तथा उनकी शरण में जाने का भाव व्यक्त किया गया है।
दुर्गा सप्तश्लोकी: देवी महात्म्य से संकलित देवी की स्तुति के सात श्लोक, जो रक्षा और मनोरथ-सिद्धि के लिए पढ़े जाते हैं।
अखिलाण्डदेवी और भगवान जम्बुकेश्वर की चार श्लोकों की संस्कृत स्तुति, जिसकी रचना शृंगेरी के जगद्गुरु ने की और जो तिरुवानैक्कावल मंदिर से जुड़ी है।
यह स्तोत्र देवी की स्तुति है जो सृष्टि की रक्षक और संहारक हैं। इसमें देवी के विभिन्न रूपों और उनकी शक्तियों का वर्णन है।
देवी महात्म्य (5.9-5.80) की देवी स्तुति, जिसमें देवता देवी को हर प्राणी में बुद्धि, निद्रा और दया के रूप में विद्यमान मानकर प्रणाम करते हैं।
यह एक दिव्य स्तोत्र है जो देवी अखिलाण्डेश्वरी की स्तुति करता है। इसमें उनके विभिन्न रूपों, बीज मंत्रों और गुणों का वर्णन है, और इसे सुख-समृद्धि तथा कल्याण के लिए पढ़ा जाता है।
माँ अम्बे गौरी की लोकप्रिय आरती: उनके तेजस्वी रूप, असुरों पर विजय और भक्तों को सुख-संपत्ति के आशीर्वाद का वर्णन, विशेषकर नवरात्रि में गाई जाती है।
यह एक प्रसिद्ध हिंदू भक्ति गीत (आरती) है जो देवी अम्बे (दुर्गा/पार्वती) की स्तुति में गाया जाता है। इसमें देवी के रूप, वाहन, शस्त्र और उनके द्वारा राक्षसों के वध का वर्णन है।
देवी दुर्गा के महिषासुरमर्दिनी रूप की प्रसिद्ध स्तुति; 30 पद्यों की रचना के 21 पद्य।
विश्वसार तन्त्र से भगवती दुर्गा के 108 नाम, जो 'ॐ सत्यै नमः' से आरम्भ होते हैं और महिषासुर, शुम्भ आदि पर उनकी विजय का स्मरण कराते हैं।
ब्रह्माण्ड पुराण में हयग्रीव द्वारा अगस्त्य को उपदिष्ट देवी ललिता त्रिपुरसुन्दरी के १००० नाम; श्रीविद्या उपासना के १८२ श्लोक।
भगवान राम के १०८ नाम, ॐ और नमः के साथ, जो रामायण में उनके कर्मों और परमात्मा के रूप में उनके स्वरूप का स्मरण कराते हैं।
श्रीविद्या परम्परा में देवी ललिता (त्रिपुरसुन्दरी) के 108 नाम, ध्यान श्लोक और समापन-अर्पण सहित।