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Embroidered artwork for गुरुद्वारा श्री पोंटा साहिब: यमुना तट पर गुरु गोबिंद सिंह जी का पावन कवि दरबार एवं तपोभूमि: Embroidered Khanda emblem with a saffron Nishan Sahib flag and marigolds at sunrise

गुरुद्वारा श्री पोंटा साहिब

यमुना तट पर गुरु गोबिंद सिंह जी का पावन कवि दरबार एवं तपोभूमि

गुरुद्वारा श्री पोंटा साहिब

यमुना तट पर गुरु गोबिंद सिंह जी का पावन कवि दरबार एवं तपोभूमि

हिमाचल प्रदेश के सिरमौर जिले में यमुना नदी के तट पर स्थित पोंटा साहिब वह पावन धाम है जहाँ दशम पातशाह गुरु गोबिंद सिंह जी ने १६८५ से १६८९ तक निवास किया था। यहाँ गुरु जी ने ५२ राजकवियों के साथ भव्य कवि दरबार आयोजित किए तथा दसम ग्रंथ की अमर वाणियों (जाप साहिब, चौपाई साहिब आदि) की रचना की।

विद्या, वीरता एवं भक्ति की पावन त्रिवेणी

सन् १६८५ में सिरमौर के राजा मेदिनी प्रकाश के आमंत्रण पर दशम पातशाह गुरु गोबिंद सिंह जी ने यमुना तट पर अपने पावन चरण रखे और इस नगर की स्थापना की।

यहाँ गुरु जी ने दिन में शस्त्र विद्या और अश्व संचालन का अभ्यास कराया तथा संध्या समय ५२ राजकवियों के साथ भव्य कवि दरबार आयोजित कर साहित्य और वीर रस की अमर धारा प्रवाहित की।

पोंटा साहिब के प्रमुख पावन अंग

मुख्य दरबार साहिब
स्थान:यमुना तट
आध्यात्मिक माहात्म्य:जहाँ गुरु जी ने 'जाप साहिब' और 'अकाल उस्तति' की रचना की।
कवि दरबार अस्थान
स्थान:नदी सम्मुख चबूतरा
आध्यात्मिक माहात्म्य:जहाँ ५२ राजकवि विभिन्न भाषाओं में ईश्वर की स्तुति करते थे।
गुरुद्वारा तीरगढ़ी
स्थान:पहाड़ी का टीला
आध्यात्मिक माहात्म्य:जहाँ से गुरु जी ने भगानी के युद्ध में बाण चलाए थे।
गुरुद्वारा भगानी साहिब
स्थान:पोंटा से ७ किमी दूर
आध्यात्मिक माहात्म्य:१६८८ के ऐतिहासिक रक्षात्मक धर्म-युद्ध की विजय का साक्षी स्थल।

शांत यमुना का रहस्य

मान्यता है कि जब कवि दरबार में कविता पाठ होता था, तब यमुना की तीव्र लहरों की आवाज से बाधा न हो, इसलिए गुरु जी के अनुरोध पर यमुना यहाँ बिल्कुल शांत होकर बहने लगी। आज भी मंदिर की दीवारों के पास यमुना अत्यंत शांत भाव से प्रवाहित होती है।

पावन जाप साहिब वाणी

नमस्तं अकाले

नमस्तं कृपाले।

नमस्तं अरूपे

नमस्तं अनूपे॥

क्या आप जानते हैं?

५२ राजकवियों का संरक्षण

गुरु गोबिंद सिंह जी ने यहाँ ५२ कवियों को संरक्षण देकर प्राचीन संस्कृत ग्रंथों का सरल लोकभाषा में अनुवाद कराया।

जाप साहिब की रचना

नित्य अमृत वेले पढ़ी जाने वाली पावन वाणी 'जाप साहिब' की रचना गुरु जी ने पोंटा साहिब में ही की थी।

भगानी का ऐतिहासिक युद्ध

मात्र २२ वर्ष की आयु में गुरु जी ने धर्म और न्याय की रक्षा हेतु भगानी का प्रथम युद्ध जीता था।

ऐतिहासिक अस्त्र-शस्त्र संग्रहालय

यहाँ गुरु जी और उनके योद्धाओं के पावन अस्त्र-शस्त्र और हस्तलिखित पांडुलिपियाँ आज भी सुरक्षित हैं।

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Guru Gobind Singh Ji

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