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Embroidered artwork for श्री वीर चालीसा: Embroidered Jain ahimsa palm with a gold wheel, white marble temples and lotuses at dawn

श्री वीर चालीसा

श्री वीर चालीसा

इदं जैनस्तोत्रं चतुर्दशाधिकत्रिंशच्चौपाइयुक्तम् आद्यन्तदोहद्वयसहितं भगवतो महावीरस्य गुणगानं जीवनचरित्रमुख्यघटनाः अहिंसाद्युपदेशाः च वर्णयति। भक्ताः श्रद्धया पठित्वा संकटमुक्तिं मोक्षं च प्राप्नुवन्ति।

पद्यानि

मङ्गलाचरणम् (दोहा)

चालीसापाठात् पूर्वं गुरुवन्दना मङ्गलाचरणदोहा च।

शीश नवा अरिहंत को, सिद्धन करूँ प्रणाम उपाध्याय आचार्य का, ले सुखकारी नाम सर्व साधु और सरस्वती, जिन मन्दिर सुखकार महावीर भगवान को, मन-मन्दिर में धार
Sheesh Nawa Arihant Ko, Siddhan Karoon Pranam. Upadhyay Acharya Ka, Le Sukhkaari Naam. Sarv Sadhu Aur Saraswati, Jin Mandir Sukhkaar. Mahaveer Bhagwan Ko, Man-Mandir Mein Dhaar.

श्लोकः दोहा

चालीसा (४० चौपद्यः)

भगवतः महिम्नः, बलस्य, कृपायाश्च संकीर्तनपराः चत्वारिंशत् चौपद्यः।

जय महावीर दया के सागर जय जिनेन्द्र गुणों के आगर
Jai Mahaveer Daya Ke Sagar. Jai Jinendra Gunon Ke Aagar.

श्लोकः 1

कुण्डलपुर के राजदुलारे त्रिशला मातु पिता सिद्धार्थ प्यारे
Kundalpur Ke Rajdulare. Trishala Matu Pita Siddharth Pyare.

श्लोकः 2

अतिशय पुण्यवान प्रभु तुम हो तीन लोक के स्वामी तुम हो
Atishay Punyawan Prabhu Tum Ho. Teen Lok Ke Swami Tum Ho.

श्लोकः 3

गर्भ विषै जब प्रभु तुम आये छप्पन कोटि देव हरषाये
Garbh Vishai Jab Prabhu Tum Aaye. Chappan Koti Dev Harshaye.

श्लोकः 4

धनपति धन की वर्षा कीन्ही सब जग में आनन्द रस भीन्ही
Dhanpati Dhan Ki Varsha Keenhi. Sab Jag Mein Anand Ras Bheenhi.

श्लोकः 5

चैत्र शुक्ल तेरस सुखकारी जनमे जग तारण अवतारी
Chaitra Shukla Teras Sukhkaari. Janme Jag Taaran Avtaari.

श्लोकः 6

इन्द्र देव सब मिलि करि आये सुमेरु पर्वत पर नहवाये
Indra Dev Sab Mili Kari Aaye. Sumeru Parvat Par Nahwaye.

श्लोकः 7

बाल रूप अति सुन्दर राजै सुर नर मुनि जन देखि ललाजै
Baal Roop Ati Sundar Raajai. Sur Nar Muni Jan Dekhi Lalajai.

श्लोकः 8

संगम सुर ने परीखा लीन्ही सर्प रूप धरि लीला कीन्ही
Sangam Sur Ne Pareeksha Leenhi. Sarp Roop Dhari Leela Keenhi.

श्लोकः 9

जरा न डरे प्रभु बालपन में महावीर नाम दियो सुरगन ने
Jara Na Dare Prabhu Baalpan Mein. Mahaveer Naam Diyo Surgan Ne.

श्लोकः 10

तीस वर्ष गृहस्थाश्रम जानो राज पाट सब तृण सम मानो
Tees Varsh Grihasthashram Jaano. Raj Paat Sab Trin Sam Maano.

श्लोकः 11

तप कल्यानक जब प्रभु कीन्हा केश लुंचन निज कर से दीन्हा
Tap Kalyanak Jab Prabhu Keenha. Kesh Lunchan Nij Kar Se Deenha.

श्लोकः 12

बारह वर्ष घोर तप कीन्हा उपसर्गों को सब सह लीन्हा
Baarah Varsh Ghor Tap Keenha. Upsargon Ko Sab Sah Leenha.

श्लोकः 13

चण्डकौशिक विषधर फुंकारा अमृत दृष्टि से ताहि उबारा
Chandkaushik Vishdhar Phunkara. Amrit Drishti Se Taahi Ubara.

श्लोकः 14

संगम सुर ने कष्ट अपारा धेर्यवान प्रभु धीर न हारा
Sangam Sur Ne Kasht Apara. Dhairyawan Prabhu Dheer Na Hara.

श्लोकः 15

केवलज्ञान हुआ जब भारी समवशरण रचना विस्तारी
Kevalgyan Hua Jab Bhari. Samavsharan Rachna Vistari.

श्लोकः 16

द्वादश सभा विषै प्रभु विराजे दिव्य ध्वनि मुखारविन्द साजे
Dwadash Sabha Vishai Prabhu Viraje. Divya Dhwani Mukharvind Saaje.

श्लोकः 17

अहिंसा परमो धर्म सिखाया जीओ और जीने दो बतलाया
Ahimsa Parmo Dharm Sikhaya. Jeeo Aur Jeene Do Batlaya.

श्लोकः 18

स्याद्वाद अनेकान्त सुहावन बानी प्रभु की अतिशय पावन
Syadvaad Anekaant Suhawan. Baani Prabhu Ki Atishay Paawan.

श्लोकः 19

चारि पदारथ पावै ज्ञानी जो जन करै महावीर गुण गानी
Chaari Padarath Paavai Gyani. Jo Jan Karai Mahaveer Gun Gaani.

श्लोकः 20

गौतम गणधर मुख्य कहाये प्रभु की देशना जग पहुँचाए
Gautam Gandhar Mukhya Kahaye. Prabhu Ki Deshna Jag Pahunchaye.

श्लोकः 21

पावापुर महं योग निरोधा कार्तिक वदी अमावस्या बोधा
Pawapur Mahan Yog Nirodha. Kartik Vadi Amavasya Bodha.

श्लोकः 22

मोक्ष पधारे वीर प्रभू जी तीन लोक में जय जयकारा
Moksh Padhare Veer Prabhu Ji. Teen Lok Mein Jai Jaykara.

श्लोकः 23

देवों ने तब दीप जलाये दीवाली का पर्व मनाये
Devon Ne Tab Deep Jalaye. Diwali Ka Parv Manaye.

श्लोकः 24

जो नर वीर चालीसा गावे सब संकट से मुक्ति पावे
Jo Nar Veer Chalisa Gaave Sab Sankat Se Mukti Paave

श्लोकः 25

रोग शोक सब व्याधि नसावे कंचन देह सुयश जग पावे
Rog Shok Sab Vyadhi Nasaave Kanchan Deh Suyash Jag Paave

श्लोकः 26

पुत्र हीन को सुत मिल जावे निर्धन धन दौलत सुख पावे
Putra Heen Ko Sut Mil Jaave Nirdhan Dhan Daulat Sukh Paave

श्लोकः 27

अन्धा देखे कोढ़ी सुधरे जो प्रभु का नित सुमिरन करई
Andha Dekhe Kodhi Sudhre Jo Prabhu Ka Nit Sumiran Karai

श्लोकः 28

चालीस दिन जो पाठ करावै भव सागर से पार लगावै
Chalis Din Jo Paath Karaavai Bhav Sagar Se Paar Lagaavai

श्लोकः 29

जिन शासन की शोभा भारी जय महावीर प्रभु सुखकारी
Jin Shasan Ki Shobha Bhaari Jai Mahaveer Prabhu Sukhkaari

श्लोकः 30

सकल मनोरथ पूरण दाता तीन भुवन के तुम पितु-माता
Sakal Manorath Pooran Daata Teen Bhuvan Ke Tum Pitu-Maata

श्लोकः 31

शरण तुम्हारी आयो स्वामी रक्षा कीजै अन्तर्यामी
Sharan Tumhari Aayo Swami Raksha Keejai Antaryaami

श्लोकः 32

कर्म काटि प्रभु मुक्ति दीजै निज पद का अधिकारी कीजै
Karm Kaati Prabhu Mukti Deejai Nij Pad Ka Adhikari Keejai

श्लोकः 33

जय जय जय महावीर स्वामी संकट हरहु दया निधि नामी
Jai Jai Jai Mahaveer Swami Sankat Harhu Daya Nidhi Naami

श्लोकः 34

नमो नमो प्रभु त्रिशला नन्दन बारम्बार करूँ वन्दन
Namo Namo Prabhu Trishala Nandan Baarambaar Karoon Vandan

श्लोकः 35

जय जिनेन्द्र जय वीतराग जागत जीव का निर्मल भाग
Jai Jinendra Jai Veetraag Jaagat Jeev Ka Nirmal Bhaag

श्लोकः 36

महिमा तुम्हारी जग विस्तारी जय महावीर दया भंडारी
Mahima Tumhari Jag Vistaari Jai Mahaveer Daya Bhandaari

श्लोकः 37

चरण शरण में राखो मोही भव बन्धन से तारो मोही
Charan Sharan Mein Raakho Mohi Bhav Bandhan Se Taaro Mohi

श्लोकः 38

जयति जयति महावीर दयाला राखो लाज करहु प्रतिपाला
Jayati Jayati Mahaveer Dayaala Raakho Laaj Karhu Pratipaala

श्लोकः 39

जो यह चालीसा नित ध्यावै सो निश्चय ही निर्वाण पावै
Jo Yeh Chalisa Nit Dhyaavai So Nishchay Hee Nirvaan Paavai

श्लोकः 40

समापनदोहा

प्रभोः हृदये नित्यनिवासार्थं पावनप्रार्थना चालीसायाः समाप्तिश्च।

वीर चालीसा जो पढ़े, मन में भक्ति धार सकल अमंगल दूर हों, पावे सुख अपार
Veer Chalisa Jo Padhe, Man Mein Bhakti Dhaar Sakal Amangal Door Hon, Paave Sukh Apaar

श्लोकः दोहा 1

करहु कृपा प्रभु वीर जी, राखो मेरी लाज हाथ जोड़ि वन्दन करूँ, पूरण कीजो काज
Karhu Kripa Prabhu Veer Ji, Raakho Meri Laaj Haath Jodi Vandan Karoon, Pooran Keejo Kaaj

श्लोकः दोहा 2

Worship Guidelines & Chanting Benefits (Phalashruti)

Auspicious Day

प्रतिदिनं अथवा शुभतिथौ

Best Time (Muhurta)

ब्राह्मे मुहूर्ते सन्ध्याकाले च

Sacred Offerings

घृतदीपः, धूपः, शुद्धपुष्पं, जलं च

Spiritual Benefits (Phalashruti)
  • मानसिकशान्तिः, आत्मोन्नतिः, मङ्गलमयवातावरणम्
Chanting Practice:Reciting 1 to 11 times daily for 40 consecutive days is traditionally practiced for resolution of difficulties.

पृष्ठभूमिः

जैनपरम्परायाम् इदं स्तोत्रम् अत्यन्तं प्रसिद्धम्। 'चालीसा' इति चत्वारिंशत्पद्यानां स्तुतिः भगवतो महावीरस्य पूजनावसरे प्रातःकाले दीपावल्यां च पठ्यते। अस्य पाठेन आध्यात्मिकलाभः मनोरथसिद्धिः च भवतीति विश्वसन्ति।

अस्य पाठस्य विषये

रचयिता: Pandit Jugal Kishore

ज्ञातव्य-विशेषः

जन्म

भगवान् महावीरस्य जन्म कुण्डलपुरे अभवत्। माता त्रिशला पिता सिद्धार्थः। चैत्रमासस्य शुक्लपक्षे त्रयोदश्यां तिथौ जन्म सम्बभूव। जन्मसमये देवाः हर्षिताः अभवन्।

बाल्यपरीक्षा

बाल्ये संगमसुरः सर्परूपं धृत्वा परीक्षाम् अकरोत्। प्रभुः न अबिभेत्। ततः देवाः 'महावीर' इति नाम अददुः।

त्यागः तपश्च

त्रिंशद्वर्षे प्रभुः गृहस्थाश्रमं त्यक्त्वा केशलुञ्चनम् अकरोत्। द्वादशवर्षाणि घोरं तपः अचरत्। चण्डकौशिकसर्पस्य फूत्कारम् अमृतदृष्ट्या उबारितवान्।

केवलज्ञानम् उपदेशः च

द्वादशवर्षान्ते केवलज्ञानम् अभवत्। समवशरणे विराज्य दिव्यध्वन्या अहिंसापरमोधर्मं स्याद्वादं च उपदिष्टवान्।

निर्वाणम् दीपावली च

पावापुरे कार्तिकमासस्य वद्यपक्षे अमावास्यायां प्रभुः निर्वाणं प्राप्तः। देवाः दीपान् प्रज्वाल्य दीपावलीपर्व अकुर्वन्।

Mahavira सम्पूर्णा स्तुतिः पाठाश्च

Mahavira

Mahavira सर्वं पश्यतु →

जैनधर्मःतः अधिकम्

सर्वं पश्यत