वसिष्ठ गुफा और अरुन्धती गुफा
ऋषिकेश के निकट गंगा तट
ऋषिकेश के ऊपर गंगा किनारे ब्रह्मर्षि वसिष्ठ की गुफा, ध्यान और मौन का स्थान। पास में माता अरुन्धती की गुफा भी है।
संक्षिप्त तीर्थ मार्गदर्शिका (एक दृष्टि में)
- •स्वरूप: ऋषिकेश के ऊपर गंगा किनारे एक प्राकृतिक गुफा, जिसे परम्परा ऋषि वसिष्ठ से जोड़ती है। भीतर शिवलिंग की पूजा होती है। पास की एक और गुफा उनकी पत्नी अरुन्धती की गुफा के रूप में स्मरण की जाती है।
- •दर्शन का फल: साधक यहाँ एक महान ऋषि के आश्रय-स्थल में मौन और ध्यान के लिए आते हैं। यहाँ ॐ नमः शिवाय या महामृत्युंजय मंत्र का जप आम परम्परा है।
- •कब जाएँ: यहाँ पूरे वर्ष जाया जा सकता है। अक्टूबर से अप्रैल का मौसम सबसे सुहावना है। महाशिवरात्रि और गुरु पूर्णिमा पूजा के विशेष दिन हैं।
- •कहाँ: ऋषिकेश से बद्रीनाथ मार्ग पर ऋषिकेश से लगभग 22 किमी ऊपर, उत्तराखंड के टिहरी गढ़वाल जिले में गंगा तट पर।
- •विधि व नियम:
- •मौन: गुफा के भीतर मौन रखें। फ़ोन बंद रखें और ऊँचे स्वर में जप न करें, ताकि दूसरे ध्यान कर सकें।
- •वस्त्र: कंधे और घुटने ढकने वाले शालीन वस्त्र पहनें।
- •स्नान: अनेक यात्री ध्यान से पहले गंगा जल से हाथ-मुँह धोते हैं।
- •अर्पण: शिवलिंग पर शांति से दीप, धूप और पुष्प अर्पित करें। यह स्थान ध्यान के लिए है, शोरगुल वाले अनुष्ठान के लिए नहीं।
पावन उद्गम एवं शास्त्रीय पृष्ठभूमि
वसिष्ठ सप्तर्षियों में से एक हैं। हिंदू परम्परा उन्हें ब्रह्मर्षि, अर्थात् ब्रह्म को जानने वाला ऋषि, मानती है। ऋग्वेद उन्हें मंडल 7 का प्रमुख द्रष्टा बताता है, जिसमें अग्नि, इंद्र और वरुण के सूक्त हैं।
वाल्मीकि रामायण में वे इक्ष्वाकु वंश के कुलगुरु हैं और राम तथा उनके भाइयों के शिक्षक हैं। कामधेनु जैसी इच्छापूर्ति करने वाली गाय शबला को लेकर विश्वामित्र से उनका विवाद बालकांड में आता है।
महाभारत बताता है कि वसिष्ठ ने अपने पुत्र खो दिए और शोक में प्राण त्यागना चाहा। कथा के अनुसार अग्नि, जल और पर्वत-शिखर ने उन्हें हानि नहीं पहुँचाई। यह वर्णन आदि पर्व में मिलता है। परम्परा आगे कहती है कि फिर वे दीर्घ तपस्या में लीन हुए।
गंगा के हिमालयी तट ऐसे ऋषियों की साधना-भूमि माने जाते हैं। स्थानीय परम्परा है कि वसिष्ठ और उनकी पत्नी अरुन्धती ने इन गुफाओं में तपस्या की। ऋषिकेश के ऊपर की गुफा उनके नाम से जानी जाती है और पास की दूसरी गुफा अरुन्धती गुफा कहलाती है।
अरुन्धती को भक्ति और दृढ़ता का आदर्श माना जाता है। हिंदू विवाह-संस्कार में वर-वधू को वसिष्ठ तारे के पास अरुन्धती तारा दिखाया जाता है, जो स्थायी दाम्पत्य का प्रतीक है।
वसिष्ठ से जुड़ा उपदेश-ग्रंथ योगवासिष्ठ है, जो राम के साथ मन, दुःख और मुक्ति पर एक लंबा संवाद है। यह राम के शोक और संसार से उनके विरक्त होने से आरंभ होता है। यह ग्रंथ छह प्रकरणों में बँटा है: वैराग्य, मुमुक्षु-व्यवहार, उत्पत्ति, स्थिति, उपशम और निर्वाण। वसिष्ठ की गुफा में ध्यान करने वाले साधक अक्सर इनमें से किसी एक का मनन करते हैं, प्रायः वैराग्य प्रकरण से आरंभ करके।
प्रमुख पावन स्थल
संत एवं साधक
पीढ़ियों से ऋषिकेश के ऊपर की ये गुफाएँ घुमंतू साधुओं और साधकों को आकर्षित करती रही हैं। अनेक लोग यहाँ घंटों मौन बैठते हैं और अनेक बस गंगा किनारे विश्राम के लिए आते हैं।
1930 में स्वामी पुरुषोत्तमानंद वसिष्ठ गुफा के समीप आकर बसे और यहाँ एक आश्रम की स्थापना की, जिससे बीसवीं शताब्दी भर यह गुफा ध्यान के लिए निरंतर उपयोग में रही। यह आश्रम आज भी स्वामी चैतन्यानंद के नेतृत्व में चल रहा है, और संतों की यही परंपरा गुफा की देखभाल करती है और आने वाले साधकों का स्वागत करती है।
जिस ऋषि का नाम इस गुफा से जुड़ा है, उनका सभी परम्पराओं में आदर है। वसिष्ठ राजाओं के गुरु और संघर्ष का उत्तर शांति से देने वाले धैर्यवान ऋषि के रूप में स्मरण किए जाते हैं। साधक अपना ध्यान आरंभ करने से पहले अक्सर उनका आदर्श याद करते हैं।
आगंतुकों के लिए एक सरल साधना है: कुछ मिनट शांत बैठें, धीरे साँस लें और एक प्रार्थना करें कि मन शांत सुबह की गंगा जैसा स्थिर हो जाए। गुफाओं तक जाने में असमतल भूमि पर चलना पड़ सकता है, इसलिए मज़बूत जूते पहनें और बारिश के बाद विशेष सावधानी रखें।
पावन स्तोत्र व ध्यान
गुफा में बैठे श्रद्धालु अक्सर वह पारम्परिक श्लोक याद करते हैं जो व्यास की वंश-परम्परा को वसिष्ठ तक ले जाता है।
व्यासं वसिष्ठनप्तारं शक्तेः पौत्रमकल्मषम् ।
पराशरात्मजं वन्दे शुकतातं तपोनिधिम् ॥
भावार्थ: "मैं वसिष्ठ के प्रपौत्र, शक्ति के निष्कलंक पौत्र, पराशर के पुत्र और शुक के पिता व्यास को प्रणाम करता हूँ, जो तपस्या के भंडार हैं।"
क्या आप जानते हैं?
ऋग्वेद वसिष्ठ को मंडल 7 का प्रमुख द्रष्टा बताता है, इसलिए वे वैदिक साहित्य के सबसे प्राचीन नामित स्वरों में हैं।
रामायण वसिष्ठ को इक्ष्वाकु वंश का कुलगुरु और राम तथा उनके भाइयों का शिक्षक बताती है।
हिंदू विवाह में वर-वधू को वसिष्ठ तारे के पास अरुन्धती तारा दिखाया जाता है, जो स्थिर दाम्पत्य का संकेत है।
योगवासिष्ठ, जो वसिष्ठ और राम के बीच मन और मुक्ति पर लंबा संवाद है, उन्हीं ऋषि के नाम पर है जिनकी गुफा ऋषिकेश के ऊपर स्थित है।
Shiva
योग से और
संबंधित शिक्षाएं
एक ही शिक्षा, विभिन्न परंपराओं में प्रतिध्वनित
