Bharat Devotion
Embroidered artwork for भयहर स्तोत्र (भगवान पार्श्वनाथ का भय-निवारक स्तोत्र): Embroidered Jain ahimsa palm with a gold wheel, white marble temples and lotuses at dawn

भयहर स्तोत्र (भगवान पार्श्वनाथ का भय-निवारक स्तोत्र)

भयहर स्तोत्र (भगवान पार्श्वनाथ का भय-निवारक स्तोत्र)

यह एक जैन भक्ति स्तोत्र है जो 23वें तीर्थंकर भगवान पार्श्वनाथ की स्तुति करता है। इसमें वर्णन है कि कैसे उनकी दिव्य शक्ति ने एक भयानक राक्षस को पराजित किया, और ऐसा माना जाता है कि इस स्तोत्र का जाप भय को दूर करता है, दुखों से रक्षा करता है और अच्छे पुनर्जन्म की ओर ले जाता है।

श्लोक

णमिउण सव्वसिद्धे, धम्मं सुद्धं च केवलं नाणं वंदिउं पासजिणं, भवभयहरणं णमंसामि
Namiuna Savvasiddhe, Dhammam Suddham Cha Kevalam Nanam Vandium Pasajinam, Bhavabhayaharanam Namamsami

श्लोक 1

जेण उवसग्गघोरे, घोरमणे उवसग्गिउं मुणिवरं धणंजयउप्पण्णं, दुट्ठेण कएण असुरेण
Jena Uvasaggaghore, Ghoramane Uvasaggium Munivaram Dhananjayuppannam, Dutthena Kayena Asurena

श्लोक 2

तेण विणिवाइउं तं, घोरं उवसग्गदुक्खमुप्पण्णं पासजिणस्स प्रभावो, तं णमंसामि सिरसाहं
Tena Vinivaium Tam, Ghoram Uvasaggadukkhamuppannam Pasajinassa Pabhavo, Tam Namamsami Sirisaham

श्लोक 3

जेण सव्वे वि जीवा, पावंति सुहं दुक्खविप्पमुक्का य तं णमंसामि पासं, भवभयहरणं णमंसामि
Jena Savve Vi Jeeva, Pavanti Suham Dukkhavippamukka Ya Tam Namamsami Pasam, Bhavabhayaharanam Namamsami

श्लोक 4

इदि कयं मणइवसूरीहिं, भयहरे थुअं पासजिणस्स जेण पडइ ण य भयं, दुग्गइदुक्खं च पावंति
Idi Kayam Manaivasuriheen, Bhayahare Thuam Pasajinassa Jena Padai Na Ya Bhayam, Duggaidukkham Cha Pavanti

श्लोक 5

पूजन विधि एवं फलश्रुति (महत्व व लाभ)

शुभ दिन व तिथि

नित्य प्रतिदिन अथवा शुभ तिथियों (एकादशी, पूर्णिमा, प्रदोष) पर

उत्तम मुहूर्त / समय

ब्रह्म मुहूर्त (प्रातः 4 से 6 बजे) अथवा संध्या काल

पूजन सामग्री व अर्पण

शुद्ध घी का दीपक, धूप, ताजे पुष्प एवं नैवेद्य/जल

फलश्रुति एवं आध्यात्मिक लाभ
  • मानसिक शांति, आत्मिक उन्नति एवं घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार

पृष्ठभूमि

यह स्तोत्र जैन परंपरा का हिस्सा है और परंपरागत रूप से जैन मुनि मणिधारी सूरि द्वारा रचित माना जाता है। भक्त इसे विशेष रूप से भय या कठिनाई के समय में भगवान पार्श्वनाथ की सुरक्षा के आह्वान के लिए पढ़ते हैं। पाठ में वर्णन है कि कैसे राक्षस धनंजय ने एक महान ऋषि को पीड़ित किया, और भगवान पार्श्वनाथ की शक्ति ने उस पीड़ा को समाप्त कर दिया। यह स्तोत्र 'भयहर' (भय-नाशक) माना जाता है और इसे अक्सर आध्यात्मिक सुरक्षा तथा नकारात्मक परिणामों से मुक्ति के लिए जपा जाता है।

इस पाठ के विषय में

रचयिता: Acharya Manatunga · जैन आचार्य · परंपरागत रूप से 6वीं–7वीं शताब्दी ईस्वी

एक जैन मुनि, जिन्हें प्रथम तीर्थंकर ऋषभनाथ की स्तुति में 48 श्लोकों वाले भक्तामर स्तोत्र की रचना का श्रेय दिया जाता है। परंपरा के अनुसार, उन्होंने इसे बंदी अवस्था में रचा, जहाँ प्रत्येक पूर्ण होते श्लोक के साथ चमत्कारिक रूप से उनकी एक बेड़ी टूट जाती थी — यह एक भक्ति-गाथा है, ऐतिहासिक रूप से सिद्ध घटना नहीं, परंतु आज इस स्तोत्र के प्रति श्रद्धा के केंद्र में यही कथा है।

Acharya Manatunga की अन्य रचनाएं

क्या आप जानते हैं?

रचना का नाम

यह स्तोत्र ‘भयहर स्तोत्र’ के नाम से प्रसिद्ध है, क्योंकि इसमें भगवान पार्श्वनाथ का भवभय (जन्म-मरण के भय) को दूर करने वाला स्वरूप वर्णित है।

रचयिता

इस स्तोत्र की रचना जैन आचार्य ‘मणदेवसूरी’ (प्राकृत में ‘मणइवसूरि’) ने की थी। ये ११वीं शताब्दी के प्रसिद्ध विद्वान और तपस्वी माने जाते हैं।

पृष्ठभूमि की कथा

मान्यता है कि धनंजय नामक एक दुष्ट असुर ने किसी मुनिराज को भयंकर उपसर्ग (कष्ट) दिया। मुनि ने पार्श्वनाथ की शरण ली, और प्रभु की शक्ति से वह संकट टल गया। यह स्तोत्र उसी घटना की स्मृति में रचा गया।

स्तोत्र का स्वरूप

यह पाँच श्लोकों का छोटा किन्तु अत्यंत प्रभावशाली स्तोत्र है। प्रत्येक श्लोक में पार्श्वनाथ की वंदना और उनके भय-हरण करने वाले गुण का गुणगान है। पाठ करने से दुर्गति और दुःख का नाश होता है, ऐसी मान्यता है।

Parshvanatha की संपूर्ण स्तुति एवं पाठ

Parshvanatha

Parshvanatha के सभी पाठ देखें →

जैन धर्म से और

सभी देखें