11th lunar day (Shukla and Krishna Paksha of every month)
एकादशी
भगवान श्री हरि विष्णु को समर्पित प्रत्येक मास के दोनों पक्षों की पावन ग्यारहवीं तिथि, जिसमें व्रत कथा, पूजन एवं जप-तप का विधान है।
24 पावन एकादशियाँ एवं व्रत कथाएँ
प्रत्येक चांद्र मास के शुक्ल व कृष्ण पक्ष की एकादशी भगवान श्रीहरि विष्णु के पावन स्वरूपों को समर्पित है। महाभारत काल में धर्मराज युधिष्ठिर द्वारा पूछे जाने पर स्वयं भगवान श्रीकृष्ण ने इन 24 एकादशियों (एवं 2 अधिक मास एकादशियों) की कथा, पूजा विधि तथा पारण के नियमों का वर्णन पद्म व भविष्योत्तर पुराण में किया है।
पापमोचिनी एकादशी
समस्त घोर पापों और शापों से मुक्ति; महर्षि मेधावी और अप्सरा मंजुघोषा का पिशाच योनि से उद्धार।
कामदा एकादशी
सर्व मनोकामना पूर्ति; पतिव्रता ललिता के व्रत प्रभाव से गन्धर्व ललित का राक्षस योनि से उद्धार।
वरूथिनी एकादशी
साधक के लिए अभेद्य रक्षा-कवच; चक्रवर्ती राजा मान्धाता को परम गति की प्राप्ति।
मोहिनी एकादशी
मोह-माया के बंधनों का नाश; महर्षि कौण्डिन्य के उपदेश से भटके हुए धृष्टबुद्धि का कल्याण।
अपरा (अचला) एकादशी
अपार पुण्य प्रदायिनी; ब्रह्महत्या, असत्य गवाही आदि घोर पापों का शमन; राजा महीध्वज का उद्धार।
निर्जला (भीमसेनी) एकादशी
समस्त एकादशियों में सर्वश्रेष्ठ; जल की एक बूँद भी न ग्रहण करने वाला कठिन व्रत; वर्ष भर की 24 एकादशियों का सम्मिलित पुण्य।
योगिनी एकादशी
समस्त शारीरिक रोगों और कुष्ठ आदि व्याधियों का निवारण; यक्ष हेममाली का महर्षि मार्कण्डेय द्वारा उद्धार।
देवशयनी (आषाढ़ी) एकादशी
चातुर्मास का शुभारंभ; भगवान विष्णु क्षीरसागर में शेषनाग पर चार मास के लिए योगनिद्रा में प्रविष्ट होते हैं।
कामिका एकादशी
अनजाने में हुए अपराधों और आत्मग्लानि से मुक्ति; तुलसी दल से श्रीहरि पूजन का अक्षय फल।
श्रावण पुत्रदा (पवित्रोपना) एकादशी
संतान सुख और कुल की वृद्धि; महर्षि लोमश के मार्गदर्शन से राजा महीजित को सुपुत्र रत्न की प्राप्ति।
अजा (अन्नदा) एकादशी
खोया हुआ राज्य, सम्मान और पारिवारिक सुख की पुनः प्राप्ति; सत्यवादी राजा हरिश्चन्द्र का उद्धार।
परिवर्तिनी (पार्श्व / वामन) एकादशी
योगनिद्रा में भगवान विष्णु करवट बदलते हैं; राजा बलि पर भगवान वामन की अनुकम्पा का पावन दिवस।
इन्दिरा एकादशी
पितृपक्ष में पड़ने वाली एकादशी; पितरों को अधोगति से मुक्ति; राजा इन्द्रसेन द्वारा अपने पिता का उद्धार।
पापांकुशा एकादशी
पापरूपी हाथी को वश में करने वाला अंकुश; महर्षि अंगिरा के उपदेश से क्रोधी शिकारी क्रोधन का उद्धार।
रमा एकादशी
महालक्ष्मी (रमा) को समर्पित; साधक के जीवन में ऐश्वर्य और शांति; राजकुमार शोभन को देवलोक की प्राप्ति।
देवउठनी (प्रबोधिनी) एकादशी
भगवान विष्णु चार माह की योगनिद्रा से जागते हैं; चातुर्मास की समाप्ति तथा पावन तुलसी-शालिग्राम विवाह।
उत्पन्ना एकादशी
एकादशी देवी का प्राकट्य दिवस; मुर दैत्य के वध हेतु भगवान विष्णु के तेज से देवी का जन्म; एकादशी व्रत का आदि उद्भव।
मोक्षदा एकादशी (गीता जयंती)
मोक्ष प्रदायिनी पावन तिथि; इसी दिन भगवान श्रीकृष्ण ने कुरुक्षेत्र में श्रीमद्भगवद्गीता का उपदेश दिया था।
सफला एकादशी
समस्त कार्यों को सफल करने वाली; वटवृक्ष के नीचे अनजाने में उपवास और रात्रि जागरण से लुम्पक का उद्धार।
पौष पुत्रदा एकादशी
पुत्र प्राप्ति और वंश रक्षा; विश्वेदेवों के आशीर्वाद से राजा सुकेतुमान और रानी शैव्या को पुत्र प्राप्ति।
षटतिला एकादशी
तिल के छह पावन प्रयोग; बिना अन्न दान के केवल तपस्या अधूरी रहती है — यह सिखाने वाली प्रेरक कथा।
जया (भैमी) एकादशी
पिशाच और प्रेत योनि से मुक्ति; गन्धर्व माल्यवान और नर्तकी पुष्पवती का इन्द्र के शाप से उद्धार।
विजया एकादशी
अजेय शत्रुओं और कठिन संकटों पर विजय; लंका पर चढ़ाई से पूर्व महर्षि बकदालभ्य के परामर्श पर श्रीराम द्वारा अनुष्ठान।
आमलकी एकादशी
आँवले (आमलकी) वृक्ष का पावन पूजन; राजा चित्रसेन और पापी शिकारी का अनजाने में आँवले के नीचे रात्रि जागरण से उद्धार।
पद्मिनी (कमला) एकादशी
अधिक मास (मलमास) के शुक्ल पक्ष की पावन एकादशी; माता अनुसूया के उपदेश से रानी पद्मिनी को प्रतापी कार्तवीर्य अर्जुन जैसा पुत्र प्राप्त हुआ।
परमा एकादशी
दारिद्र्य और घोर अभाव का समूल नाश; महर्षि कौण्डिन्य के उपदेश से निर्धन ब्राह्मण सुमेधा और उनकी पत्नी पवित्रा को कुबेर जैसा ऐश्वर्य प्राप्त हुआ।